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हस्तिनापुर की प्राचीनता
भारत एक अद्भुत धनाड्य देश है क्योंकि यहाँ सदैव आध्यात्मिक महापुरुषों ने जन्म लेकर अपने त्याग, तपस्या एवं साहित्य लेखन आदि के द्वारा अमूल्य निधियां विश्व को प्रदान की हैं. इसे हम दुसरे शब्दों में ऐसे भी कह सकते हैं की . यहाँ अयोध्या, हस्तिनापुर, बनारस, उज्जैन आदि अनेक पवित्र नगरियाँ हैं जिन्हें आज से कोड़ा कोडी वर्ष पूर्व इन्द्र ने बसाया था . भगवान ऋषभदेव के प्रथम पुत्र, प्रथम चक्रवर्ती सम्राट भरत के नाम पर ही देश का नाम 'भारतवर्ष ' पड़ा है, ऐसा प्राचीन इतिहास एवं वेद पुरा्णों के माध्यम से ज्ञात होता है. जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों में से 16-17-18 वें तीन तीर्थंकर श्री शांतिनाथ, कुन्थुनाथ , अरहनाथ का जन्म हस्तिनापुर में हुआ था, करोडो वर्ष पूर्व यहाँ पर इन तीर्थंकरों के चार चार कल्याणक हुए थे और तीर्थंकर, चक्रवर्ती, कामदेव इन तीन पदों के धारक इन तीनों महापुरुषों ने हस्तिनापुर को राजधानी बनाकर यहाँ से छः खंड का राज्य संचालित किया था. आज से लगभग 86500 वर्ष पूर्व महाभारत काल में भी हस्तिनापुर नगरी भारत की राजधानी मानी जाती थी. तब दिल्ली और हस्तिनापुर को संभवत एक ही माना जाता था . जैसा की पं. जवाहरलाल नेहरु ने अपनी पुस्तक The Discovery of India.के पृष्ठ 107 पर लिखा है - Dilli or Delhi, not the modern city but ancient cities situated near the modern site, named Hastinapur and Indraprastha becomes the metropolis of India. इससे ज्ञात होता है की जिसे हम दिल्ली नाम से जानते हैं वह कभी हस्तिनापुर एवं इन्द्रप्रस्थ कहलाता था अत: दिल्ली और हस्तिनापुर को एक दुसरे के पूरक ही समझना चाहिए.