दान योजनाएँ
जम्बुद्वीप क्या है ?
जैन भूगोल का ज्ञान करने वाली जम्बुद्वीप रचना हमारी विशाल सृष्टी की प्रतिकृति है. इसके बीचों बीच में निर्मित सुमेरु पर्वत इस रचना का मध्य केंद्र बिंदु मन जाता है. और इस सुमेरु पर्वत के कारण जम्बुद्वीप रचना के अन्दर पूर्व-पश्चिम, उत्तर-दक्षिण चार प्रकार से भिन्न भिन्न रचना के रूपों का ज्ञान होता है जिसमे पूर्व और पश्चिम की रचना पूर्व विदेह क्षेत्र और पश्चिम विदेह क्षेत्र के नाम से जानी जाती हैं. तथा दक्षिण दिशा में भारत क्षेत्र की प्रमुखता के साथ अन्य विजयार्ध, हिमवान आदि पर्वत, गंगा -सिन्धु आदि नदियाँ, हैमवत आदि क्षेत्र कल्पवृक्षों से सहित भोगभूमि के दृश्य, चैत्यालय, देवभवन, ्कुण्ड, उपवन आदि दिखाए गए हैं एवम इसी प्रकार उत्तर दिशा में ऐरावत क्षेत्र की प्रमुखता के साथ ऐसी ही पृथक नाम वाली सभी रचनाऍ॑ बनी हैं. सुमेरु पर्वत के बिलकुल नजदीक धरती पर उत्तर में धातु का जम्बुवृक्ष और दक्षिण में शाल्मलिवृक्ष बनाकर उनमे भी मंदिर दिखाएँ गएँ हैं. इन सभी रचनाओं का वर्णन यदि पहले ठीक प्रकार से तिलोयपण्णत्ती, त्रिलोकसार, तत्वार्थसुत्र आदि ग्रंथो में पढ़ लिया जाए पुन: जम्बुद्वीप के एक एक हिस्से को देखे तो वास्तविक ज्ञान शीघ्र हो जाता है. शास्त्रों के अनुसार दिए गए पुर्वचार्यो के निर्णयानुसार वर्तमान का सम्पूर्ण विश्व (चारों महाद्वीपों) दक्षिण भाग के भारत क्षेत्र में ही प्राप्य है, शेष विशाल सृष्टी तक आज हम पहुँच नहीं सकते हैं.